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कविता संग्रह

कबीर ग्रंथावली
कबीर
संपादन - श्याम सुंदर दास

अनुक्रम साखी - असाध कौ अंग पीछे     आगे

 

कबीर भेष अतीत का, करतूति करै अपराध।
बाहरि दीसै साध गति, माँहैं महा असाध॥1॥

उज्जल देखि न धीजिये, बग ज्यूँ माँड़ै ध्यान।
धीरे बैठि चपेटसी, यूँ ले बूड़ै, ग्याँन॥2॥

जेता मीठा बोलणाँ, तेता साध न जाँणि।
पहली थाह दिखाई करि, ऊँड़ै देसी आँणि॥3॥480॥
(टिप्पणी: ख-तेता भगति न जाँणि।)


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