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कविता

एक जीवन के लिए
मंगलेश डबराल


शायद वहाँ थोड़ी सी नमी थी
या हल्का सा कोई रंग
शायद सिरहन या उम्मीद

शायद वहाँ एक आँसू था
या एक चुंबन
याद रखने के लिए
शायद वहाँ बर्फ थी
या छोटा सा एक हाथ
या सिर्फ छूने की कोशिश

शायद अँधेरा था
या एक खाली मैदान
या खड़े होने भर की जगह
शायद वहाँ एक आदमी था
अपने ही तरीके से लड़ता हुआ।


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