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कविता

कविता
मंगलेश डबराल


कविता दिन-भर थकान जैसी थी
और रात में नींद की तरह
सुबह पूछती हुई :
क्या तुमने खाना खाया रात को ?


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हिंदी समय में मंगलेश डबराल की रचनाएँ