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कविता

मौसम इतने सर्द हो गए
अश्वघोष


मौसम इतने
सर्द हो गए
गुलमोहरों के चेहरे देखो
अमलताश से जर्द हो गए।
 
कोहरे ने
आतंकित करके
हरियाली का बाना छीना,
पत्ती-पत्ती
काँप रही है
पेड़ों को आ रहा पसीना
पता नहीं
क्यों सारे माली
अनायास बेदर्द हो गए।

पंछी ढूँढ़ें
रैन-बसेरा
आँखें ढूँढ़ें रही हैं फल को,
सहमा-सहमा
सारा उपवन
क्या होगा जाने अब कल को
पहले कभी
नहीं थे इतने
अब जितने ये दर्द हो गए।
 


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