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कविता

नए साल में नया कलेंडर
प्रदीप शुक्ल


नए साल में
नया कलेंडर
लेकिन दुख हैं वही पुराने

पंचायत में
फिर से होगा
वही पुराना हल्ला गुल्ला
माननीय को कैंटीन में
चालिस पैसे का रसगुल्ला
चालिस रुपयों में
लाएगा
मँगरू कुछ अरहर के दाने
भ्रष्टाचार
हमारी रग में
अब भी है, कल भी दौड़ेगा
देश हमारा फिर से इसमे
नूतन कीर्तिमान जोड़ेगा
हम सारे ही
स्वयं भ्रष्ट हैं
आओ पहले यह पहचानें

नए साल में
आस पुरानी
दुनिया में सुख शांति अमन हो
'आयलान' अपने घर में हो,
नहीं जलधि में जलमग्न हो
खेल खेलना
बंद करें अब
दुनिया के ये देश सयाने
नए साल में
नया कलेंडर
लेकिन दुख हैं वही पुराने।

(आयलान - सीरियाई बच्चा जो देश छोड़ते समय समुद्र में गिर गया था)
 


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