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कविता

रास्ते
प्रतिभा कटियार


हम दोनों ही अपने रास्ते खो चुके थे
और नए रास्ते तलाश रहे थे
हम दोनों बहुत थक गए थे
लेकिन हारे नहीं थे
हम दोनों उदास थे
और मुस्कुराहटें ढूँढ़ रहे थे
हमारी त्वचा पे उभर आई झुर्रियों में
किसी रिश्ते का नाम नहीं था
हम दोनों खो गए थे खुद से
लेकिन एक-दूसरे को थामे हुए थे
हमारे भीतर थोड़ी सी मृत्यु शेष थी
और एक पूरा जीवन
प्यार का पता नहीं
लेकिन कुछ था हमारी हथेलियों में
रेखाओं के अलावा...
 


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