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लोककथा

तकरार
तोल्सतोय

अनुवाद - सुकेश साहनी


राह से गुजरते दो मुसाफिरों को एक किताब पड़ी दिखाई दी। किताब देखते ही दोनों इस बात पर तकरार करने लगे कि किताब कौन लेगा।

ऐन इसी वक्त एक और राहगीर वहाँ आ पहुँचा। उसने दोनों को इस हालत में देखकर कहा, 'भाई, यह बताओ, तुम दोनों में पढ़ना कौन जानता है?'

'पढ़ना तो किसी को नहीं आता।' दोनों ने एक साथ जवाब दिया।

'फिर तुम इस किताब के लिए तकरार क्यों कर रहे हो...। तुम्हारी लड़ाई तो ठीक उन गंजों जैसी है जो कंघी हथियाने के लिए पुरजोर कोशिश में लगे हैं... जबकि कंघी फिराने के लिए उनके सिर पर बाल एक भी नहीं है।'


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