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बाल साहित्य

ओ पापड़ वाले मुझसे पंगा न ले
विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी


"ओ पापड़ वाले मुझसे पंगा न ले ........" ये पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए विरेश ने पास रखी प्लेट से आलू चिप्स के कुछ टुकड़े मुँह में रखे तथा क्रिच... क्रिच.... आवाज निकालता हुआ खाने लगा। रात के दस बज कर चालीस मिनट हो चुके थे। टीवी पर उसका प्रिय कार्टून सिरियल फेंटम और शैतान जादूगर आ रहा था। अभी ब्रेक होने के कारण वह चिप्स खा कर समय निकाल रहा था। विरेश ने शेर अकारण नहीं बोला था। उसे समझ में आने लगा था कि वह कक्षा में अपना स्थान सुरक्षित नहीं रख पा रहा था। पढ़ाई ठीक नहीं कर पाने के कारण दूसरे टेस्ट में उसके अंक कुछ कम आए थे मगर कक्षा में तीसरे स्थान से फिसल कर चौदहवें स्थान पर चला गया था।

विरेश नौ बजे तक सो जाया करता था मगर जबसे कार्टून सिरियल फेंटम और शैतान जादूगर देखना शुरू किया वह ग्यारह बजे तक मुश्किल से सो पाता था। कई बार फेंटम.... का सिरियल पूरा होने के बाद अगला कार्यक्रम देखने बैठ जाता था। विरेश की मम्मी आ कर बहुत कोशिश करती थी तब जाकर टीवी बंद करता था। देर से सोने के कारण सुबह समय पर उठने में भी उसको परेशानी होती थी। सुबह समय पर तैयार नहीं हो पाने के कारण, एक दो बार तो, स्कूल बस उसे छोड़ कर चली गई थी। उसे ऑटो से स्कूल भेजना पड़ा था।

कुछ दिन बाद विरेश की दीदी छुट्टियों में घर आई तो विरेश को देख कर आश्चर्य में पड़ गई। विरेश की दीदी श्रेया मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही थी। चार माह बाद घर आई थी। चार माह की अवधि में विरेश में आए परिवर्तन ने श्रेया को परेशानी में डाल दिया था। विरेश के स्कूल जाने के बाद श्रेया ने माँ से पूछा था, ''माँ क्या आपको नहीं लगता कि विरेश कुछ बदल-सा गया है। उसका कितना वजन बढ़ गया है। कुछ-कुछ सुस्त भी दिखाई देने लगा है।''

''हाँ, कुछ फर्क तो पड़ा है। उम्र बढ़ रही है सो कुछ तो असर होगा ही" माँ ने कहा।

''इतना तो मैं भी समझती हूँ माँ, मगर विरेश उम्र की तुलना में बहुत अधिक मोटा हुआ है'' श्रेया ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा।

"विरेश का शरीर ही मोटा नहीं हो रहा। मुझे तो लगता है उसकी अक्ल भी मोटी होती जा रही है। कक्षा में पिछड़ रहा है। उसकी ट्यूशन वाली मेडम ने भी मुझे बताया की आजकल विरेश का मन पढ़ाई में कम लगता है। मैं माँ बेटे के बीच कम ही बोलता हूँ।" पास बैठे श्रेया के पापा ने कहा।

समस्या का कारण पता लगाने की दृष्टि से श्रेया ने विरेश की दिनचर्या का अध्ययन किया तो पाया कि विरेश की नींद पूरी नहीं हो रही थी। पहले विरेश रात्रि नौ बजे सो जाया करता था। अब ग्यारह बजे सोने लगा था। स्कूल जाने के कारण उसको पूर्व वाले समय पर ही उठना पड़ता था। दिन में सोने का कोई अवसर नहीं मिल पाता था।

''माँ मेरा विचार है कि विरेश की नींद पूरी नहीं हो पाना ही उसके मोटापे तथा पढ़ाई में पिछड़ने का कारण है। आँख में पाए जाने वाला प्रकाश संवेदी वर्णक मेलानाप्सिस शरीर में स्थित जैविक घड़ियों को प्रभावित करता है। जैविक घडी कें गड़बड़ा जाने से शरीर में बनने वाले मैलाटोनिन, इंसुलिन आदि हारमोनों का उत्पादन नियमित नहीं रह पाता'' श्रेया ने माँ को बताया। श्रेया की बात सुन माँ कुछ नहीं बोली। कुछ देर श्रेया का मुँह ताकती रही।

''श्रेया क्या यह सब सच है?'' कुछ देर बाद माँ ने श्रेया से प्रश्न किया।

''मैं झूठ क्यों बोलूंगी। विरेश मेरा भाई है। मुझे उसकी चिंता है। वैज्ञानिको ने प्रयोग कर देखा है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती वे कोला, चिप्स, कुरकुरे जैसे स्टार्ची चीजे ज्यादा खाने लगते हैं। उनकी दिन की सक्रियता पर भी विपरीत असर होता है। वे पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। बिना मतलब ही उनके हाथ पैर चलने लगते हैं'' श्रेया ने कहा।

''यह तो बहुत बुरी बात है। मुझे तो चिंता सताने लगी है" माँ बोली तथा हाथ का काम छोड़ सिर पकड़ कर बैठ गई।

''माँ चिंता करने से कुछ नहीं होगा। उपाय करने से ही कुछ होगा'' श्रेया बोली।

''चिंता की बात यह कि विरेश आजकल कुछ जिद्दी भी होता जा रहा है। मेरे समझाने का उस पर कुछ असर नहीं होता। तेरे पापा या तो कुछ कहते नहीं या फिर पीटने को उतर आते हैं" श्रेया की माँ ने अपनी चिंता प्रकट करते हुए कहा।

शाम को श्रेया विरेश के पास गई। उसने विरेश को अपने एक प्रॉजेक्ट में मदद करने को कहा। विरेश के हाँ कहने पर श्रेया ने एक प्रश्नोत्तरी विरेश को दी। प्रश्नोत्तरी में देर रात तक जागने वाले बच्चों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे।

''यह प्रश्नोत्तरी तुम्हें भरनी है तथा तुम्हारे कुछ दोस्तों से भी पूरी करानी है" श्रेया बोली।

विरेश ने कुछ क्षण के लिए टीवी से नजर हटा कर प्रश्नोत्तरी को देखा और एक तरफ रख दिया। श्रेया और कुछ नहीं बोली। सुबह विरेश के स्कूल जाने के बाद श्रेया उसके कमरे में गई। श्रेया के अनुमान के अनुसार उसके द्वारा दी गई प्रश्नोत्तरी के पन्ने वहीं पर रखे थे। स्कूल से लौट कर विरेश खाना रहा था तब श्रेया आ कर उसके पास बैठ गई। इधर-इधर की बातें करती रही। उसने यह प्रकट नहीं किया कि आज सुबह वह उसके कमरे में गई थी।

''विरेश तुमने मेरा काम किया?'' विरेश के खाना समाप्त करने के बाद श्रेया ने प्रश्न किया।

"हाँ... हाँ... मैंने वे पन्ने अपने दोस्तों को दे दिए हैं। वे कल ले आएँगे।'' प्रश्न सुन कर एक बार चौंका था, विरेश फिर साफ झूठ बोल गया।

''अच्छा कल ही सही मगर तुमने तो अपना पन्ना भर लिया होगा?'' श्रेया ने फिर प्रश्न किया।

''हाँ... मगर थोड़ा बाकी है। अभी पूरा कर देता हूँ।'' विरेश बोला तथा जल्दी से अपने कमरे में जाकर प्रश्नोत्तरी पढ़ने बैठ गया। कुछ समय बाद वह श्रेया के पास गया और पूछा कि वह यह सब प्रश्न क्यों पूछ रही है?

''पश्चिमी देशों में मधुमेह याने डायबीटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चे भी इसके शिकार हो रहे है। इसका कारण पता करने का प्रयास किया गया तो यह बात सामने आई कि पूरी नींद नहीं ले पाने के कारण ऐसा हो रहा है। एक प्रयोग में वैज्ञानिकों ने कुछ किशोरों को निरंतर तीन रात तक गहरी नींद नहीं सोने दिया। मात्र तीन रात ठीक से नहीं सोने के कारण उनके रक्त में ग्लकोज की मात्रा नियंत्रित करने की व्यवस्था गड़बड़ा गई थी। भारत में पश्चिमी जीवन शैली अपनाई जा रही है। मुझे अपने प्राजेक्ट से यह देखना है कि भारत के बच्चों की दिनचर्या में बदलाव का उनके जीवन पर कोई बुरा प्रभाव पड़ रहा है या नहीं।'' श्रेया ने बताया।

विरेश कुछ नहीं बोला। उठ कर अपने कमरे मे चला गया और गृहकार्य करने बैठ गया। उस रात सवा नौ बजे श्रेया वीरेश के कमरे में गई तो देखा कि विरेश सो चुका है।


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