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कविता

जब मरते हैं
वेलिमीर ख्लेब्निकोव

अनुवाद - वरयाम सिंह


जब घोड़े मरते हैं वे हाँफने लगते हैं,
जब घास मरती है वह सूख जाती है ?
जब सूर्य मरते हैं वे बुझ जाते हैं,
जब मनुष्‍य मरते हैं - वे गीत गाते हैं।

 


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