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कविता

टाइगर टाइगर
मार्क ग्रेनिअर

अनुवाद - रति सक्सेना


टाइगर टाइगर, सुलगते सपने
लपकते, हमारे स्क्रीन में जलते हैं

आँखें जिन प्रतिबिंबों को ग्रहण करती हैं
वे हमारी बैठकों में लालटेन हैं

चिह्न खोजने वालों ने अपनी निगाहें जमाईं
टाइगर लिलि, टाइगर ईसा,
टाइगर तुम क्या हो सकते हो
चिह्न गुलाब जैसे फैलते हैं

हमारी हर बीमारी के लिए कुछ
टाइगर बाम, या टाइगर गोली
प्याला भर टाइगर के लिंग का सूप
हर निराशा की रामबाण दवा

शृंखला ने क्या देखा - तुम्हारे हरे
और पुराने साजो सामान को साफ करते हुए
रोशनी लाए भटकन के लिए और बरछे
उन दिलों के लिए, जो अब यहाँ नहीं हैं

जंगल के मस्तिष्क से सूत्रयुग्मन
मानसून की बरसात जैसे मांसल
भुतई भूसे के भीतर खुदा
तुम्हें दहाड़ना चाहिए या हँसना चाहिए

टाइगर टाइगर - यह मंत्र है
स्वर व्यंजनों के पूर्वगामी हैं
फुटेज देखो... रास्ता बनाओ
अपने परिणाम के साथ जलते हुए

 


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