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कविता

दूसरा जन्म
लेओनीद मर्तीनोव

अनुवाद - वरयाम सिंह


मुझे लगता है यह मेरा दूसरा जन्‍म है
मैं पहले भी कभी जिया हूँ।

मेरा नाम हर्क्‍युलिस था।
तीन हज़ार पाउंड था मेरा वजन
जड़ों समेंत मैं उखाड़ देता था जंगल-के-जंगल
आसमान तक पहुँचते थे मेरे हाथ
बैठने पर मेरे वजन से टूट जाती थी कुर्सियाँ -

फिर मेरा देहांत हुआ।
मैंने जन्म लिया दोबारा
सामान्‍य कद और सामान्‍य वजन
दूसरों की तरह मैं भी एक -
भला और प्रसन्‍न।
अब मैं कुर्सियाँ नहीं तोड़ता
पर फिर भी मैं हूँ हर्क्‍युलिस।

 


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