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कविता

चीजें रहेंगी सुंदर (बुलात ओकुझावा के लिए)
यून्‍ना मोरित्‍स

अनुवाद - वरयाम सिंह


बेमतलब नहीं होती चीजें सुंदर
काले वर्ष में भी नहीं उगते
बेमतलब मेपल, बेमतलब सरई
और तालाब में बेमतलब फूल।

किसी डरावने दृश्‍य को देखे बिना
काली छाया में भी नहीं बहती
लहरें, गीत, बेमतलब चमक
और बेमतलब आँसू और दिन।

तरह-तरह की पड़ती रही मुसीबतें
पर काली शताब्दियों में भी बेमतलब नहीं हुई
बेमतलब राई, बेमतलब वक्त
चूसनियों में बेमतलब दूध।

स्‍पष्‍ट है यह बात, एकदम स्‍पष्‍ट
यहाँ और अन्‍यत्र कहीं भी
बेमतलब नहीं होती चीजें सुंदर
इसलिए तो वे शायद खींचती है अपनी तरफ।

सुंदर है रहस्‍य, सुंदर है जादू
सुंदर है बादलों के पीछे से तारों की पुकार :
यूँ ही नहीं होती चीजें सुंदर
वे रहेंगी सुंदर जैसी हैं वे आज।

 


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