डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

कविता

हास्यबोध
व्‍याचेस्‍लाव कुप्रियानोव

अनुवाद - वरयाम सिंह


स्‍वागत होता है
परिवार के मुखिया का
जब घोषणा करता है
घर में अब खाने के लिए कुछ नहीं
ऐसे हास्‍यबोध के साथ
कि हँसते-हँसते
बच्‍चों के पेट में बल पड़ जाते हैं

स्‍वागत होता है
राज्‍य के मुखिया का
जब अपनी जनता के सामने
युद्ध की घोषणा करता है
ऐसे हास्‍यबोध के साथ
कि पूरी तरह हथियारों से लैस जनता के
हँसी के मारे दॉंत गिर जाते हैं

स्‍वागत होता है
संविधान के मुखिया का
जो घोषित करता है
कि हास्‍यबोध
हर अच्‍छे नागरिक का
पवित्र कर्तव्‍य है

 


End Text   End Text    End Text