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कविता

अधिकतर मैं अपने लिए ही अजनबी हूँ
मस्सेर येनलिए

अनुवाद - रति सक्सेना


मेरे लिए, मैं एक अजनबी के साथ रहती हूँ

गोया कि मेरे कूदते वह मेरे भीतर से निकल गिर जाएगा
मैं अपनी गर्दन के नीचे देखती हूँ
उसके बालों से अपने बाल तक
उसके हाथों से अपने हाथ तक

जमीन के भीतर, मेरे हाथों की जड़ें
मैं दर्द सहती धरती हूँ, अपने भीतर
ना जाने कितनी बार
मैंने अपना कुचला मन पत्थरों के भीतर छोड़ दिया
मैं सोई जिससे उसे आराम मिले
मैं उठी जिससे वह जा सके

अपनी इस नींद से मैंने क्या सीखा

मैं अजनबी के साथ रहती हूँ
गोया कि मेरे कूदते वह मेरे भीतर से निकल गिर जाएगा

 


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