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लोककथा

माँ बनने का सुख
खलील जिब्रान


एक सीप ने पड़ोसी सीप से कहा, "मुझे बड़ा तेज दर्द महसूस हो रहा है। कोई भारी और गोल चीज़ है। मेरा दम निकला जा रहा है।"

दूसरी सीप ने अभिमानपूर्वक कहा, "ईश्वर को और सागर को लाख-लाख धन्यवाद। मुझे किसी प्रकार का दर्द नहीं है। मैं बाहर और भीतर दोनों ओर से ठीक-ठाक हूँ।"

उसी समय एक केकड़ा वहाँ से गुजर रहा था। उसने उन दोनों की बातचीत सुनी। उसने बाहर-भीतर से स्वस्थ सीप से कहा, "बेशक, तुम पूरी तरह ठीक हो। लेकिन जिस दर्द को तुम्हारी पड़ोसिन झेल रही है, वह अत्यन्त सुन्दर एक मोती है।"


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हिंदी समय में खलील जिब्रान की रचनाएँ