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लोककथा

दमित अभिलाषा
खलील जिब्रान

अनुवाद - बलराम अग्रवाल


नौजवान कवि ने रानी से कहा, "आय लव यू।"

रानी ने जवाब दिया, "मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ, मेरे बच्चे!"

"लेकिन मैं आपका बच्चा नहीं हूँ। मैं एक मर्द हूँ और आपको प्यार करता हूँ।"

उसने कहा, "मैं ऐसे बेटे-बेटियों की माँ हूँ जो खुद बेटे-बेटियों के माँ-बाप हैं। और मेरे बेटों में से एक का बेटा तो उम्र में तुमसे भी बड़ा है।"

युवा कवि ने कहा, "फिर भी, मैं आपसे प्यार करता हूँ।"

इस घटना के कुछ ही दिनों बाद रानी का देहांत हो गया। और उस समय, जब उसकी अन्तिम साँस धरती की महान साँस में विलीन होने को थी, उसने अपने हृदय में कहा, "मेरे प्यारे, मेरे इकलौते बेटे, नौजवान कवि, कोई दिन जरूर आएगा जब हमारा मिलन होगा और मैं सत्तर साल की नहीं होऊँगी।"


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