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लोककथा

स्पर्श
खलील जिब्रान

अनुवाद - बलराम अग्रवाल


आप अन्धे हैं और मैं गूँगा-बहरा।

इसलिए चीजों को समझने के लिए हमें परस्पर-स्पर्श का सहारा लेना चाहिए।


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हिंदी समय में खलील जिब्रान की रचनाएँ