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लोककथा

अन्तर
खलील जिब्रान

अनुवाद - बलराम अग्रवाल


समय को हम अनगिनत सूर्यों की गति की गणना करके नापते हैं। और वे उसे जेब में रखी एक छोटी-सी मशीन से।

अब तुम्ही बताओ कि हम उसी स्थान पर उसी समय दोबारा कैसे मिल सकते हैं?


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हिंदी समय में खलील जिब्रान की रचनाएँ