डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

लोककथा

नक़ाब
खलील जिब्रान

अनुवाद - बलराम अग्रवाल


औरत एक मुस्कान से अपने चेहरे को ढँक सकती है।


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में खलील जिब्रान की रचनाएँ