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कविता

कायापलट
ताद्यूश रोजेविच

अनुवाद - अशोक पांडे


मेरा नन्हा बेटा
कमरे में घुसता है और कहता है
"आप एक गिद्ध हैं

मैं एक चूहा"
मैं अलग धर देता हूँ अपनी किताब
पंख और नाखून
उगने लगते हैं मुझ में से

उनकी मनहूस छायाएँ
दौड़ती हैं दीवारों पर
मैं एक गिद्ध हूँ
वह एक चूहा है

"आप एक भेड़िया हैं
मैं बकरी"
मैंने एक चक्कर लगाया मेज का
मैं एक भेड़िया हूँ
खिड़की के शीशे चमकते हैं
अँधेरे में
जहरीले डंकों जैसे

जबकि वह दौड़ जाता है अपनी माँ के पास
महफूज
माँ की पोशाक की गर्मी में छिपा हुआ उसका सिर

 


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