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लोककथा

सत्जुग भी, कल्जुग भी
रामदेव धुरंधर


राजनेता ने चुनाव में जयी होने के लिए एड़ी चोटी का बल रखा था। वह पराजित होना नहीं चाहता, चाहे उसे कुछ भी करना पड़ता। वह इत्मीनान से एक गुफा में जा छिपा। उसकी हिदायत के अनुसार उसके आदमियों ने पूरे चुनाव इलाके में बात उड़ाई, उसे उठा लिया गया है। लोगों की भावना में उतर कर वोट पाने का यह नाटक रंग लाता कि नहीं यह बाद का प्रसंग होता। अभी हुआ यह कि सत्जुग ने गुफा से बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया और उस के हिस्से का जो कल्जुग था उसे अवश जान कर विपक्ष में चला गया।


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