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लोककथा

रिहा
रामदेव धुरंधर


अहानो एक बेटी की माँ बनी। उसकी बेटी जन्म के चौथे दिन झूले से गिरने पर बच नहीं पाई। उसने अपने पति को भी खोया। पति की मौत जहर से हुई। अहानो ने पुलिस को बताया था उसका पति घुड़दौड़ में बहुत पैसा हार कर लौटा था। उसी गम में उसने आत्म हत्या कर ली।

अहानो अब अपने घर में अकेली हुई। पति पैसा छोड़ गया था। वह उसी पैसे से जी रही थी। उसे अपने घर के सामने कुरसी डाले बैठे देखा जाता था। एक दिन एक महिला आकर उसे डाँटते हुए बोली - तुम्हारे कारण मेरी रिहा डर गई है। जब देखो बाल फैलाए बैठी रहती हो।

रिहा इस महिला की बेटी थी। रिहा पहली क्लास में दाखिल हुई थी। आज स्कूल का पहला दिन था। वह अपनी बहन के साथ स्कूल जा रही थी कि अहानो को देखने पर डर गई थी। उसने अपनी बहन का हाथ कस कर पकड़ लिया था। यही नहीं, वह बहन के पीछे छिप कर रोने लगी थी। अहानो ने यह सब देखा नहीं था। अलबत्ता वह कुरसी पर बैठी थी और बच्चे स्कूल जा रहे थे। उसने महिला से कहा वह क्यों किसी की बेटी पर बुरी दृष्टि रखे। पर महिला ने उसे माना नहीं। वह अहानो से बोली कल से इस तरह बैठा न करे। अहानो बोली नहीं बैठेगी। पर अगले रोज वह बैठी हुई थी। उसे रिहा को देखना था।

शाम को पुलिस अहानो के घर आई। रिहा के माँ बाप ने जा कर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाई थी। उनकी रिहा बहुत बीमार हो गई थी। वह कहती थी वह कुरसी पर बैठी हुई औरत उसे जान से मारना चाहती है। पुलिस ने अहानो से जब यह सब कहा तो वह रोने लगी। वह बोली उसे बदनाम किया जा रहा है। पुलिस समझ न पाई क्या कहे। फिर भी अहानो से कहा गया एक बच्ची ने ऐसा कहा है तो वह कुछ दिनों के लिए स्कूल के वक्त अपने आँगन में बैठा न करे। अहानो ने माना नहीं बैठेगी। पर वह बैठती।

उसी शाम रिहा मर गई! उसके माँ बाप ने पुलिस स्टेशन में लिखवाया था अहानो के कारण उनकी बेटी मरी है। पुलिस को दोबारा अहानो के घर आना पड़ा। पर थोड़ी पूछताछ के अलावा पुलिस अपने को निरुपाय पा रही थी। तो भी यह मामला यूँ ही खत्म नहीं हुआ। अहानो की ओर अनदेखी अँगुली उठ रही थी। उस अँगुली ने बहुत जल्द आदमी की शक्ल ग्रहण की। उसने अहानो से पूछा - तुमने ऐसा क्यों किया था?

अहानो रहस्य से बाहर आई। उसे गृहस्थी से आकंठ विरक्ति थी। यही गाँठ, बल्कि यही सुप्त पागलपन अपने मन बसाए उसने शादी की थी। बेटी और पति में बँधकर भी वह अपनी उस गाँठ, उस पागलपन से मुक्त नहीं हुई।

उसने अपनी बेटी और पति को मारा!

अहानो के बाकी दिन पागलखाने में कट रहे हैं। अकसर देखा जाता है आँखें फैलाए वह बाहर की ओर देखा करती है। उसे कहते सुना जाता है उसे रिहा को देखना है। उससे जब पूछा जाता है कौन रिहा तो वह कहती है - मेरी बेटी रिहा!


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