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कविता

सवार
हेलेन सिनर्वो

अनुवाद - रति सक्सेना


सूरज के पीछे से, क्षणिक तूफान की क्रोधित गोद से
वह सीधा इस रीडिंग लैंप के नीचे आया
और आवेश में एक कमरे से दूसरे में चहलकदमी करने लगा
            कंधों के ऊपर से पदक चले आ रहे थे
और जो घड़ी है, पहचान का पुराना आधार
            इतनी छोटी कि चम्मच में समाए

चरागाह और वेरोनिका उसकी पलकों के नीचें हैं... वह बाहर क्या कर रहा था?

दौड़ पट्टी बना रहा था, या फिर घुटने टेक बैठा था
            कमजोर दूब पर
अपने खिलौनों के सामने

 


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