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कविता

यह अंधियारा समय है प्रिय
मार्टिन कार्टर

अनुवाद - सरिता शर्मा


यह अंधियारा समय है प्रिय
हर जगह धरती पर रेंगते हैं भूरे झींगुर
चमकता सूरज छुप गया है आकाश में कहीं
सूर्ख फूल दुख के बोझ से झुक गए हैं
यह अंधियारा समय है प्रिय
यह उत्पीड़न, डार्क मेटल के संगीत और आँसुओं का मौसम है।
बंदूकों का त्योहार है, मुसीबतों का उत्सव है
लोगों के चेहरे हैरान और परेशान हैं चहुँ ओर
कौन टहलता आता है रात के घुप्प अँधेरे में?
किसके स्टील के बूट रौंद देते हैं नर्म घास को
यह मौत का आदमी है प्रिय, अपरिचित घुसपैठिया
देख रहा है तुम्हें सोते हुए और निशाना साध रहा है तुम्हारे सपने पर।

 


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