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कविता

वापसी
ताद्यूश रोजेविच

अनुवाद - सरिता शर्मा


अचानक खिड़की खुल जाएगी
और माँ बुलाएगी
आने का समय हो गया है
दीवार हट जाएगी
मैं गंदे जूते समेत
स्वर्ग में प्रवेश करूँगा
मैं मेज पर आऊँगा
और बेरुखी से सवालों के जवाब दूँगा

मैं ठीक हूँ मुझे छोड़ दो
अकेला
सिर को हाथों में पकड़े मैं
बस बैठा रहता हूँ
मैं उन्हें कैसे बता सकता हूँ
उस लंबे और उलझे
रास्ते के बारे में

यहाँ स्वर्ग में माताएँ
बुनती हैं हरे स्कार्फ

मक्खियाँ भिनभिनाती हैं

पिता ऊँघते हैं स्टोव के पास
छह दिनों की मेहनत के बाद
नहीं - मैं उन्हें हरगिज नहीं बता सकता
कि लोग
एक दूसरे के खून के प्यासे हैं

 


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