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कविता

सरनामी देवी
मार्तिन हरिदत्त लछमन श्रीनिवासी

अनुवाद - पुष्पिता अवस्थी


सरनामी देवी
तू बेदाग भारतीय कली
मनोहर और आकर्षक
सरनामी उपवन को
तुम अपनी मुस्‍कुराहट से भरती

फूल-सी सुंदर तुम पार्वती
कमल-सी कोमल तुम पार्वती
तुमको पतझर छूता नहीं
तुमको पंक दूषित करता नहीं

सरनामी देवी रहो सदा
स्‍पर्श करती तुम्‍हारी अपनी श्रेष्‍ठता

रमणीय तुम सरनामी दुलारी
सावित्री बनो इस देश की
धारिणी रहो नील कमला
गाता है दिल रसीली तान में
जीवित रखो मुझे सरनामी देवी
तुझे प्रणाम... प्रणाम

 


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