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कविता

शर्म नहीं अनुभव करें
मार्तिन हरिदत्त लछमन श्रीनिवासी

अनुवाद - पुष्पिता अवस्थी


हमें शर्म नहीं महसूस करनी चाहिए
विश्‍वास प्रसाद
शर्म नहीं अनुभव करें
कमल देव
नमक, मिर्चा और भात
हमलोग खा लेंगे
भविष्‍य के काले धब्‍बों से दिनों के लिए
हमलोग बाँट लेंगे
गरीबी की फफूँद खायी रोटी
कठोर परिश्रम से दुबली हो चुकी
लू खायी जिंदगी
गंभीर है जो हमारी बातचीत में
फिर भी खुशी से भरी है
सुगंधित आशा के बीच
शर्म नहीं महसूस करें - पोनीकम1

शर्म नहीं अनुभव करें - वौकरमिन2
चावल के साथ कनकोम3
हमलोगों को स्‍वाद देगा
नाली में उगी हुई कनकोम कीड़ों की फसल है।
तुम्‍हारा मौन और माधुर्य
यह तुम्‍हारी पहचान है
कौन मार सकता है इसे

शर्म नहीं महसूस करें वीर महान लोगो
तुम्‍हारी सरलता इस जमीन की सतह को
नहीं बदल सकती है।
परिश्रम का प्रतीक स्‍वरूप
पवित्र चिह्न - तुम्‍हारी यह पसीना भीगी हथेली है।

हाँ, इसाईयो ! मैं तुमलोगों से पूछूँगा
शहर के निकम्‍मे, बदमाश लोग
किस तरह से हमारे ईश्‍वर से प्रार्थना करेंगे
दो बार में दो तरह से नहीं पेश हो सकते है
जो ज्ञान और तथ्‍यों से भरे हुए हैं हमेशा
जिनका जीवन मासिक वेतन से सुरक्षित है हमेशा
जो सिर झुकाकर प्रार्थना करते हैं
जो दूसरों के द्वारा हम सबके लिए व्‍यवस्थित किए जाते हैं।
मेरा मतभेद है उनसे
हमारी गहराई हमें दे दो
जिससे हम दूसरों को उनकी गहराई दे सकें।
मजदूरों के कंधों पर कर्ज और बोझ
गुणात्‍मक रूप से बढ़ रहा है
सड़क से हमलोगों को आने दो
जो गुलामी और कोका-कोला संस्‍कृति से बना है
शर्म नहीं अनुभव करो - विश्‍वास प्रसाद

शर्म नहीं महसूस करो - बॉक रामिन
तुम्‍हारे और तुम्‍हारे बुझे सपनों के लिए
तुम और तुमसे प्रेम करनेवाली पत्‍नी
वह ताकत, सत्ता और यश वैभव को पाएगी
भगवान कृष्‍ण के नाम पर
अल्‍लाह और नाजरथ के शहर के नाम पर
और विश्‍व की सार्वभौम शक्ति के नाम पर

1. जेपनीज स्‍त्री नाम, 2. जेपनीज इंडोनेशियन पुरुष नाम, 3. साफ-सुथरी नाली में उगे हुए कीड़ों की फसल।

 


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