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कविता

न्यू इंग्लैंड 1967
होर्हे लुईस बोर्हेस

अनुवाद - सरिता शर्मा


मेरे सपनों में आकृतियाँ बदल गई हैं;
अब साथ लगे लाल घर हैं
और काँसे रँगी नाजुक पत्तियाँ
और अक्षत सर्दी और पावन लकड़ी
सातवें दिन की तरह दुनिया
अच्छी है साँझ में बनी हुई है
किंचित साहसी, उदास प्राचीन बुदबुदाहट,
बाईबिलों और युद्ध की
जल्द ही पहली बर्फ गिर जाएगी (वे कहते हैं)
अमेरिका मेरा इंतजार कर रहा है हर सड़क पर,
मगर कल कुछ पल ऐसा लगा और आज बहुत देर तक
ढलती शाम में महसूस करता हूँ
ब्यूनस आयर्स, मैं भटकता हूँ
तुम्हारी सड़कों पर बेवक्त या अकारण

 


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