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कविता

प्रार्थना
मारीना त्स्वेतायेवा

अनुवाद - सरिता शर्मा


ईसू हे परमात्मा मुझे और बहुत चाहिए
अब यहाँ दिन शुरू हुआ है
हे ईसू हे पालनहार
मुझे चाहिए चमत्कार
अभी यहाँ सुबह सुबह
बाँच ली है मैंने जिंदगी की किताब
तो मरने दें मुझे करने दें प्रस्थान
आप विद्वतजन कह सकते हैं मुझे कड़ाई से
'धैर्य रखो अभी जाने का वक्त नहीं है तुम्हारा'
खुद दी है तुमने हद से ज्यादा पीड़ा
हर तरह प्यासी हूँ अब मैं
मुझे सब कुछ चाहिए जिप्सी की तरह
भागूँगी लूटने के लिए, गीत गाते हुए
ऑर्गन के पास, अफसोस मनाना चाहती हूँ सबका
दौड़ना चाहती हूँ युद्ध करते हुए अमेजन में
अँधेरे दुर्ग में दिव्य तारों की छाँव तले
परछाइयों में राह बनाते बच्चे
गुजरा कल बन जाये किंवदंती
और हर दिन है पागलपन का
प्रिय हैं मुझे सूली, रेशम और आवरण
आत्मा में पल भर झाँका तो लगा
तुमने मुझे बचपन दिया कल्पनातीत
मरने दें अब मुझे सत्रहवें साल में

 


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