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बाल साहित्य

मेरी गुड़िया तेरा गुड्डा
उपासना


मेरी गुड़िया तेरा गुड्डा
चल करते हैं शादी
तुम बनना गुड्डे के अब्बा
मैं गुड़िया की दादी।

फटा दुपट्टा दीदी का
अम्मा की पीली साड़ी
लहँगा, गोटे, चुनरी से
सँवरी यह राजदुलारी।

शादी तो कर देंगे हम
पर क्या खिलाएँ खाना,
कहाँ से लाएँ मेज व कुर्सी
कहाँ सजे शमियाना।

अक्ल सुझाई चंपक ने
छोड़ो यह ताना बाना।
मैं लाता हूँ बिस्कुट घर से
टॅाफी तुम ले आना।

 


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हिंदी समय में उपासना की रचनाएँ