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कविता

प्रस्थान
अन्ना अख्मातोवा

अनुवाद - सरिता शर्मा


हालाँकि यह धरती मेरी अपनी नहीं है,
मुझे याद रहेगा इसका अंतर्देशीय समुद्र
और जल जो इतना शीतल है
झक्क सफेद रेत
मानो पुरानी हड्डियाँ हों, हैरानी है देवदार के पेड़
वहाँ सुर्ख लाल होते हैं जहाँ सूरज नीचे आता है

मैं नहीं बता सकती यह हमारा प्यार है
या दिन, जो खत्म हो रहा है


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हिंदी समय में अन्ना अख्मातोवा की रचनाएँ