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कविता

आजादी की उड़ानें
सुकृता पॉल कुमार

अनुवाद - सरिता शर्मा


कई आए, दस्तक दी और चले गए
लेकिन मेरी दोस्त, सिमोन दि बोउवा तुम नहीं
तुम नहीं गई,
सेकंड सेक्स, मैंडरिन्स और सभी किताबें;
मेरे निज की नाजुक झिल्लियों को खींचती हुई
रिवाज को भावना से अलगाती हुई
मेरे समस्त प्यारों के दोराहों पर
तुमने मेरे भीतरी अंधड़ के दरवाजे में प्रवेश किया
मेरी मार्गदर्शक सितारा, मेरी प्रकाशस्तंभ
मेरी दोस्त, तुम मेरी दुश्मन हो
मुझे दूरवर्ती समुद्र में फेंकने वाली
शार्कों और व्हेलों के बीच
तुम मुझे आग के मुहानों तक ले गई
इस्मत, ऐनी आपा और सिल्विया प्लाथ भी,
सब पुरुष, मेरे विचार
प्रकाश और लपटों की गेंद के जन्म के लिए
मेरी उपासना की प्रेरणा,
ग्रीक उभयलिंगी हाथ मिलाते हुए
अर्धनारीश्वर के साथ

इस भूमि पर उतरते हुए,
मैं यह सब देखती हूँ,
लावे की राख
सिमोन के इलाके के ऊपर बिखरी हुई है
प्रकाश के गोले उड़ते हैं
पूर्व और पश्चिम के बीच
लिंगभेद से परे, पुरुष और महिला से परे


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