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कविता

संयुक्त मोर्चा गीत
बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय


चूँकि आदमी एक इनसान है
(हाड़ मांस का पुतला है)
चाहिए होगी उसे रोजी रोटी
भरेगा नहीं पेट उसका जुमलों से
क्योंकि जुमले कोई भोजन नहीं ।

इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ
वही है स्थान तुम्हारा कॉमरेड,
हो जाओ शामिल कामगारों के संयुक्त मोर्चे में
क्योंकि हो तुम भी एक कामगार ।

चूँकि आदमी एक इनसान है
(हाड़ मांस का पुतला है)
इसलिए जरूरत है उसे कपड़ों और जूतों की
जुमले देते नहीं उसे गरमाहट
और न ही देता नगाड़ा उसे गरमाहट ।
इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ !

चूँकि आदमी एक इनसान है
(हाड़ मांस का पुतला है)
नहीं पसंद करता वह तमंचा अपने माथे पर
नहीं चाहता वह अपने पैरों तले कोई गुलाम
न ही कोई मालिक अपने ऊपर ।
इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ !

और क्योंकि सर्वहारा है एक सर्वहारा
नहीं करेगा उसे दूसरा कोई आजाद
हो सकती है मुक्ति कामगार की
मात्र अपनी मेहनत से ही कामगार की ।
इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ
वही है स्थान तुम्हारा कॉमरेड,
हो जाओ शामिल कामगारों के संयुक्त मोर्चे में
क्योंकि हो तुम भी एक कामगार ।


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