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कविता

पहला
महेश वर्मा


आप पहले कवि हैं इस भाषा के
आप पहले स्वतंत्रता-सेनानी
आप पहले कमीने हैं इस क्षेत्र के
आप पहले ग्रेजुएट, आप पहले दलाल

पृथ्वी की पहली आवाज़ के स्याद्वाद से
अधिक हास्यास्पद हैं ऊपर लिखे वाक्य

क्योंकि हम इतने बीच में हैं इस सब के
कि हम जानते हैं
कि किसी भी चीज़ की शुरुआत के बारे में
हम कुछ नहीं जानते
मसलन यह सड़ा हुआ प्याज
जो कुचला गया हमारी हवाई-चप्पल से
हम नहीं जानते इसकी शुरुआत - प्याज की
सड़न की
चप्पल की
चलने की
यह इतिहास का प्रश्न नहीं है न पुरातत्त्व का
कार्बन-परीक्षण के दशमलवांकित आँकड़ों से अलग
यह झूठ की भाषा का पहला शब्द हो शायद

शुरुआत एक मोहक शब्द है लेकिन अर्थहीन
इसका अलंकारिक महत्व है झूठ की और झुका हुआ

 


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हिंदी समय में महेश वर्मा की रचनाएँ