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कविता

किससे छूट गया
महेश वर्मा


जाने किससे छूट गया खेत में।
आयु, गुलामी, दौड़, ईर्ष्या
किससे छूट गया?
खाता हूँ कीचड़, फफूँद, कीड़े
पानी, हवा, धूप पीता हूँ
छूट ग़या खेत में।
उग आई है घास
कानों में, सीने में, आँखों की कोटर में,
नथुनों से झरते हैं परागकण
मुँह उगलता है बीज
भूल गया साँस लेना, भूल गया शब्द।
ईर्ष्या, दौड़, गुलामी, आयु
किससे छूट गया खेत में।


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