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कविता

इस साल
स्नेहमयी चौधरी


सुना है, इस साल सब सालों से अधिक ठंड पड़ेगी
जितनी पहले कभी नहीं पड़ी ।
दिसंबर में जब यह हाल है -
हाथ-पैर ठंड से सिकुड़ रहे हैं -
जनवरी में क्या होगा ? - मालूम नहीं...

मन तो कब का जम चुका,
अब तन पर क्या असर होगा ?
शरीर पर ऊनी कपड़े, टोपा, मोजा,
बी कैप चाहे जितना लादो
कुछ असर नहीं होनेवाला...
जब कुछ नहीं तो रूम-हीटर जलाओ ।
कमरा गरम करने का
गरीब देश में और कोई उपाय नहीं -
लकड़ी जलाने पर पाबंदी है...
और वह मिलती भी कहाँ है !


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हिंदी समय में स्नेहमयी चौधरी की रचनाएँ