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कविता

दिनचर्या
स्नेहमयी चौधरी


टूटी टाँग के साथ
वह अकेले में
टेलीफोन और उसकी डायरी
अपने पास लेकर बैठ गई ।


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हिंदी समय में स्नेहमयी चौधरी की रचनाएँ