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कविता

कैद अपनी ही
स्नेहमयी चौधरी


किसने कहा था
खूँटा जो गड़ा है
उससे बँधी रस्सी के एक सिरे पर
कसकर गाँठ बांध दो
दूसरे सिरे के गोल घेरे में
अपनी गरदन डाल दो
रस्सी तुड़ाकर भागो
लेकिन बार-बार वापस आ
उसी के आसपास घूमती रहो
कहना किसे है - ऐसे में
जब खुद अपनी ही कैद में
गिरफ्त हो 'मैं' !


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हिंदी समय में स्नेहमयी चौधरी की रचनाएँ