कमरे में बिल्कुल सन्नाटा साथ थी सिर्फ ऊब कितने जतन के बाद भी जा ही नहीं रही
तभी हल्की सिहरन के साथ ठंड का स्पर्श खुशबू एक देह की हल्की ठंड की एक परत हटानी है दर्द होगा तभी तो वसंत आएगा।
हिंदी समय में विनीता परमार की रचनाएँ