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कविता

अंतिम बूँद, अनंतिम प्यास
स्कंद शुक्ल


अखबार में बात छपी थी नई
पहला जीव पानी में नहीं, थल पर हुआ था।
विज्ञान है : पहले में रुचि रखता है, अंतिम में भी
उज्जवल में सबसे, मद्धिम में भी।
ज्ञान कुछ भी कहे, भान यही कहता है
पहला जीव जल-थल में नहीं जन्मा था,
पहला जीव तो पानी स्वयं था
और अंतिम भी होगा।
पहली बूँद पहला प्राण थी
पहला स्रोत पहला हृदय
पहली बात अश्रु थी
पहला स्वेद एकांत का भय,
जनसंख्या नहीं वह जलसंख्या है
जीवन की वर्तुलता लिए
जिस दिन अंतिम ताप से तप कर
आसमान में उड़ जाएगी
उस दिन पात्र रह जाएगा रीता
पानी-बिन प्यासा हमेशा।


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