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लेख

स्मार्ट ग्रिड
डॉ. भारत खुशालानी


स्मार्ट ग्रिड एक बिजली वितरण नेटवर्क है जो अपने भीतर ही बहने वाली बिजली की निगरानी कर सकता है और बदलती परिस्थितियों के आधार पर समायोजन कर सकता है। ऐसा करने के लिए वह स्वचालित रूप से नेटवर्क को समनुरूप बनाता है और उस नेटवर्क से जुडी हुई बिजली की माँग और उत्पत्ति पर नियंत्रण का स्तर स्थापित करता है।

परंपरागत रूप से बिजली की उत्पत्ति छोटी संख्या में उपलब्ध बड़े बिजली स्टेशनों द्वारा की जाती है। फिर जिन क्षेत्रों में बिजली की जरूरत होती है वहाँ उसे संचरण प्रणाली के माध्यम से बहुत अधिक वोल्टेज पर परिवहित किया जाता है। उसके बाद वितरण नेटवर्क की मदद से कम वोल्टेज पर उसे उपभोग्तायों तक वितरित किया जाता है। वितरण नेटवर्क पर बिजली का प्रवाह एक तरफा होता है - विद्युत शक्ति, उच्च वोल्टेज वाले संचरण नेटवर्क से, अंतिम उपभोगता तक पहुँचती है - इसका विपरीत कभी नहीं होता है। संचरण पद्धतियाँ हमेशा से होशियार रही हैं लेकिन संचरण नेटवर्क से निकलने के पश्चात स्थिति ऐसी नहीं है।

परंपरागत वितरण ग्रिड 'निर्माण और जोड़' के सिद्धांत पर बनाए गए हैं। जब नए आवास का निर्माण किया जाता है, तब विश्वसनीय डिजाइन सिद्धांतों को लागू करके संभावित अधिकतम प्रत्याशित बिजली की खपत (जिसको बिजलीवाले 'लोड' कहते हैं) के लिए नेटवर्क को आकार दिया जाता है। फिर बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाता है, उन्हें घरों से जोड़ा जाता है, और उसके बाद नेटवर्क के जीवनकाल तक कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

हालाँकि, वैश्विक गर्मी ('ग्लोबल वार्मिंग') के कारण बहुत से देशों पर कम प्रंगार ('कार्बन') अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का दबाव बनता जा रहा है। प्रंगार हमारे पर्यावरण के लिए खतरनाक है। किसी भी देश में हुई बिजली की उत्पत्ति की नाप उसके द्वारा पैदा किए गए प्रंगार पदचाप द्वारा की जा रही है। इससे पारंपरिक 'निर्माण और जोड़' की संस्कृति कालग्रस्त होती जा रही है। परिणामस्वरूप, बिजली वितरक 'निर्माण और जोड़' से 'जोड़ और प्रबंध' की संस्कृति पर स्थानांतरित होने के लिए मजबूर हो गए हैं। अब वितरण नेटवर्क को स्वं के उपकरणों पर नहीं छोड़ा जा सकता है। नेटवर्क पर तेजी से बदलती माँगों से निपटने के लिए, जिन उपभोक्ताओं की वे सेवा करते हैं, उनके साथ मिलकर सक्रिय रूप से नेटवर्क प्रबंधन किया जाना चाहिए।

एक नया नेटवर्क शुरू से ही स्मार्ट होने के लिए डिजाइन किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा 'बेवकूफ' नेटवर्क को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से जोड़कर अधिकांश ग्रिडों को स्मार्ट बनने की आवश्यकता है। इसलिए एक स्मार्ट ग्रिड एक ऐसा बिजली वितरण नेटवर्क है जिसमे नेटवर्क के साथ कुछ अतिरिक्त सूचना और संचार प्रौद्योगिकी है।

लेकिन स्मार्ट ग्रिड को सक्षम करने के लिए सिर्फ प्रौद्योगिकी की ही आवश्यकता नहीं है। जिस प्रकार से वितरण ग्रिडों की योजना, संचालन और प्रबंधन होता है, उसमे एक विशाल परिवर्तन चाहिए। स्मार्ट ग्रिड को सुचारु रूप से काम करने के लिए वितरण, आपूर्ति, उत्पादन और संचरण कंपनियों के बीच मौजूदा वाणिज्यिक और विनियामक संबंधों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है।

एक स्मार्ट ग्रिड वितरित होने वाली बिजली की बेहतर दृश्यता प्रदान कर सकता है और नेटवर्क के साथ-साथ नेटवर्क से जुड़ी माँग और उत्पादन का सक्रिय रूप से प्रबंधन कर सकता है। स्मार्ट ग्रिड स्वचालित रूप से विद्युत शक्ति की दिशा बदलता है और 'लोड' की तबदीली करता है। वह सन्निहित उत्पादन का नियंत्रण भी स्वं ही करता है और नेटवर्क पर आने वाली बाधाओं और कटौतियों का स्वं ही प्रबंधन करता है। वह नेटवर्क परिसंपत्तियों की स्थिति की निगरानी करता है और बिजली मार्ग की असफलता की भविष्यवाणी करता है। इस प्रकार रख-रखाव लागत को कम करता है। स्मार्ट ग्रिड अधिकतम बिजली वितरण के लिए बुद्धिमानी से नेटवर्क का प्रबंधन करता है। इससे सुदृढ़ीकरण को टाला जा सकता है और निवेश की लागत कम हो जाती है।

इतने स्वचालन, और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर इतनी निर्भरता होने के कारण, स्मार्ट ग्रिड को साइबर सुरक्षा का कड़ा प्रबंध करना पड़ता है ताकि वो किसी साइबर आपराधिक प्रवृत्ति वाले के द्वारा किए गए दुर्भावनापूर्ण हमले का शिकार न हो जाए।


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