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लेख

मेकाट्रोनिक्स
डॉ. भारत खुशालानी


यांत्रिकाणुकी (मेकाट्रोनिक्स) यांत्रिकी और परमाणुकी का संगम है। जो वस्तुएँ यंत्रों से बनती हैं और परमाणु की से संचालित होती हैं, उनका अध्ययन मेकाट्रोनिक्स के क्षेत्र में होता है। ये वस्तुएँ कैसे काम करती हैं, इसकी जानकारी भी इस क्षेत्र में मिलती है। मेकाट्रोनिक्स में यांत्रिकी और परमाणु की के अलावा कंप्यूटर अभियांत्रिकी और बुद्धिमत नियंत्रण प्रणालियों का सहक्रियात्मक और समवर्ती उपयोग होता है। इसका उपयोग विद्युत-यांत्रिकीय उत्पादों का प्रतिरूप बनाने, उनका विश्लेषण करने, उनकी प्रारूप में और उनके विकास में होता है। इन विद्युत-यांत्रिकीय उत्पादों का कार्यान्वयन कैसे होना चाहिए, यह भी मेकाट्रोनिक्स के अंदर आता है। साथ ही साथ ऐसे उत्पादों को वैज्ञानिक और अभियांत्रिक तरीके से 'होशियार' बनाने की पद्धति भी इसके अंतर्गत आती है।

चूँकि आधुनिक मशीनों और विद्युत-यांत्रिकी उपकरणों को आम तौर पर अंकीय परमाणु की और कंप्यूटर का उपयोग करके नियंत्रित किया जा रहा है, ऐसी प्रणालियों में यांत्रिक अभियांत्रिकी की प्रौद्योगिकियों को परमाणु की और कंप्यूटर अभियांत्रिकी से अलग नहीं किया जा सकता है। इसीलिए मेकाट्रोनिक्स में इन तीनों का ही समन्वय होता है। उदाहरण के लिए, रोबोट में यांत्रिक घटकों को अंकीय परमाणु की घटकों के साथ एकीकृत किया जाता है। इस एकीकरण से एकल कार्यात्मक ईकाइयों का उत्पादन होता है। मेकाट्रोनिक्स के ढाँचे में, विभिन्न प्रकार के घटकों और कार्यों को संघठित करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाता है। इन घटकों और कार्यों में दोनों, यांत्रिकी और परमाणु की शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य एक सामंजस्यपूर्ण संचालन प्रदान करना है, जो प्रदर्शन विनिर्देशों की वांछित स्थितियों को पूरा कर सके।

मेकाट्रोनिक्स में बहुआयामी मिश्रित दृष्टिकोण अपनाया जाता है। इसमें यांत्रिक तत्वों में तरल और ऊष्ण तत्व होते हैं, और विद्युत में परमाणु तत्व होते हैं। इन तत्वों को एकीकृत अभियांत्रिकी अवधारणाओं का उपयोग कर इस प्रकार से गंठित किया जाता है कि वे सुचारु रूप से काम कर सकें। कभी-कभी पूरे तरीके से बन जाने के बाद ये काम तो करते हैं, पर वह कार्य नहीं करते हैं जिसके लिए इन्हें बनाया गया है। इसको सुधारने के लिए इनका फिर से प्रारूपीकरण करना पड़ता है।

मेकाट्रोनिक्स में विद्युत-यांत्रिकी उपमाओं का प्रयोग किया जाता है। इसमें एकीकृत प्रारूपीकरण तरीके अपनाकर संगत तरीके से ऊर्जा का स्थानांतरण किया जाता है। इन ऊर्जाओं में गतिक, सामर्थिक, ऊष्मीय, तरल, विद्युतस्थैतिक और विद्युतचुंबकीय ऊर्जाएँ शामिल होती हैं। इसके परिणामस्वरूप इन मेकाट्रोनिक यंत्रों का प्रदर्शन, उनकी दक्षता और उनकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है। इससे उनकी लागत में भी बहुत फरक पड़ता है।


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