नैतिकता एक भारी पत्थर है
सीने पर बैठा रहता है
पहली शादी की असफलता
दूसरे तीसरे चौथे प्रेम की संभावना को दूर दूर रखती है
बस कभी कभी बात कर लेती हूँ
अच्छा लगता है
जैसे अभी
असफलता
कितनी डरावनी होती है
तीस साल की मुझ लड़की से पूछे
मेरा तीन साल का बच्चा
किसी से नहीं डरता, अपने पिता के अलावा
पहले प्रेम में
फिर शादी में
अब जीवन में नैतिकता के साथ
जीवन का बोझ
कंधे थक गए है
किसे दिखाए
ना, ना...
अच्छा लगना
अच्छा होना नहीं है
घर परिवार समाज
ओ पढ़ा लिखा मास्टर तक
मेरे अंदर एक दरवाजा देखता है
अली बाबा का खजाना देखता है
कैसे समझाऊँ
कैसे समझूँ
किस से कहूँ
कैसे निबटूँ
मेरे बच्चे
मैं एक औरत थी
अभी दोनों हूँ
डरती हुई भी
लड़ती हुई भी।