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कविता

ईटा-पीटा
नीरज पांडेय


एक
रहेन 'ईटा'
एक रहेन 'पीटा'
ईटा मरि गएन त के बचा..?

एक बच्चा बोला.... 'पीटा'
पूछने वाले बच्चे ने उसे पीट दिया
इससे पहले कि वो मास्टर से शिकायत करता
उसने फुसला लिया उसे
यह कहकर
कि चलो
दूसरे को पीटेंगे यार
तुम अपनी कसर निकाल लेना
पहला मूका मारकर

वो अपनी गैंग बनाकर
सरदार बनना चाह रहा था
और बना भी
सबको पीटा

लेकिन अब
उसके पूछने पर
कोई 'पीटा' नहीं बोलता
सब पिट चुके थे
सिर्फ उसी को छोड़कर

उसे गैंग टूटने का डर लगने लगा
सारी पैंतराबाजी
सारे दाँव
उल्टे पड़ने लगे
चिंता में पड़ गया सरदार

हमने उसकी चिंता दूर की
यह पूछकर

(एक
रहेन 'ईटा'
एक रहेन 'पीटा'
ईटा मरि गएन त के बचा..?)

बोल बच्चा
के बचा..?
बच्चा एकदम चुप्प
हमने कहा
बेटा पैंतरेबाजी का एक समय होता है
तुम्हारा चुक चुका
अब तुम्हारी मुर्गा बनने की बारी है!


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