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कविता

गोया
पंकज चतुर्वेदी


कार से टकराते बचा
वह आदमी भी
कार चलाती स्त्री को
देखकर मुस्कराया

गोया औरत के हाथों
मारा जाना भी
कोई सुख हो


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हिंदी समय में पंकज चतुर्वेदी की रचनाएँ