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कविता

मोक्ष
पंकज चतुर्वेदी


काशी में मरकर
मिलता होगा मोक्ष
पर उज्जयिनी में जीते-जी

उज्जयिनी की माँग में
सिंदूर भरता है
महाकाल


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हिंदी समय में पंकज चतुर्वेदी की रचनाएँ