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कविता

आलमपनाह के बाद आलमपनाह
नरेंद्र जैन


वे आए
उन्होंने पूछा
आलमपनाह के बाद कौन?
यहाँ से वहाँ तक दौड़ गई
मुल्क में चिंता की एक लहर
आलमपनाह के बाद कौन?
जरूरी थे आलमपनाह
जरूरी थी उनकी मौजूदगी
शुरुआत से वे
इतना मौजूद रहे
किसी ने कभी सोचा तक नहीं
आलमपनाह हो सकते हैं गैरमौजूद भी
आलमपनाह जानते थे
आलमपनाह के आगे और पीछे
सिर्फ आलमपनाह हो सकते हैं
आलमपनाह ने उनसे पूछा
मेरे बाद कौन?
उन्होंने आपस में पूछा
आलमपनाह के बाद कौन?
उन्होंने तय पाया
आलमपनाह के बाद सिर्फ
आलमपनाह
उन्होंने कहा
कल आज और कल
सब आलमपनाह
सबने ली चैन की एक साँस
आलमपनाह के बाद आलमपनाह


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