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कविता

खबर
नरेंद्र जैन


खबर जैसी होगी
उसी रफ्तार
उसी आकार में फैलेगी
जंगल की आग
अचानक बारिश
और धूल के बवंडर सी उड़ेगी वह
खबर दौड़ती है
उड़ती है यहाँ अफवाह
अफवाह है कि राजा लापता है
खबर है कि मुकाबला कर रहा है
अफवाह है कि सेना ने हथियार डाल दिए
खबर है कि सेनापति कै़द कर लिया गया
अफवाह है कि कातिल को फाँसी होगी
खबर है कि मुठभेड़ में मारा गया
खबर बेशक अफवाह से
बेहतर चीज है
लेकिन यह भी सच है कि
यहाँ कोई खबर आती ही नहीं
देखा जाए तो
यहाँ हर शख्स
एक
खबर के इंतजार में है


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हिंदी समय में नरेंद्र जैन की रचनाएँ



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