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कविता

एक दिन शिनाख्त
नरेंद्र जैन


एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हम क्या कर रहे थे?
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हमारी नींद कितनी गहरी थी?
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हमारी आवाज कौन छीनकर ले गया?
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हमारी आँखों को एकाएक क्या हुआ?
एक दिन
हमारी नब्ज
टटोली जाएगी
एक दिन
कतार में खड़े
हम
अपनी अपनी सजा का
इंतजार कर रहे होंगे


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हिंदी समय में नरेंद्र जैन की रचनाएँ



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