hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

महलों पर कुटियों को वारो
माखनलाल चतुर्वेदी


महलों पर कुटियों को वारो
पकवानों पर दूध-दही,
राज-पथों पर कुंजें वारों
मंचों पर गोलोक मही।

सरदारों पर ग्वाल, और
नागरियों पर बृज-बालाएँ
हीर-हार पर वार लाड़ले
वनमाली वन-मालाएँ

छीनूँगी निधि नहीं किसी -
सौभागिनि, पुण्य-प्रमोदा की
लाल वारना नहीं कहीं तू
गोद गरीब यशोदा की।


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाएँ